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| करवा चौथ 2023 | पतिव्रता धर्म |
1. करवा चौथ व्रत 2023 में कब है ? करवा चौथ 2023 में व्रत समय, पूजा शुभ मुहर्त और चंद्रोदय :-
• करवा चौथ व्रत 2023 में 01 नवंबर, बुधवार को रखा जाएगा।
• करवा चौथ में व्रत (उपवास) समय :- सुबह 6:37 से रात्रि 8:27 तक
~ कुल व्रत अवधि : 13 घंटे 50 मिनट
• करवा चौथ 2023 में पूजा का शुभ मुहूर्त :- 01 नवंबर 2023, शाम को 5 बजकर 40 मिनट से रात्रि 07 बजकर 05 मिनट तक
~ कुल पूजा मुहर्त अवधि: 01 घंटे 20 मिनट
• करवा चौथ 2023 में चाँद निकलने का समय :- रात्रि 8 बजकर 28 मिनट पर। अलग- अलग शहरों में चांद निकलने के समय में बदलाव हो सकता है।
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2. करवा चौथ क्यों और कहाँ मनाया जाता है ?
• करवा चौथ सौभाग्यवती (सुहागिन) और पतिव्रता भारतीय हिन्दू नारियों द्वारा अपने पतियों के उत्तम स्वास्थ्य सहित लंबी उम्र और उन्हें सभी तरह के कष्टों से दूर करने के लिए एक व्रत के रूप में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है। करवा चौथ का व्रत ग्रामीण महिलाओं से लेकर आधुनिक महिलाओं तक सभी महिलाएं बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ करती हैं। इसे भारत के दिल्ली,पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित विश्व के कई देशों में रह रही भारतीय सुहागिन और पतिव्रता महिलाओं द्वारा पूरे हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है।
3. करवा चौथ व्रत की विशेषता !
• करवा चौथ व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती महिला को ही यह व्रत करने का अधिकार है। महिला किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती (सुहागिन) महिला अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं, वे यह व्रत अपना पतिव्रता धर्म निभाने के लिए रखती हैं।
4. करवा चौथ का व्रत किस दिन रखना चाहिए ?
• हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की व्यापिनी चतुर्थी के चंद्रोदय के दिन करना चाहिए। यह व्रत इस दिन सूर्योदय से पहले सुबह करीब 4 बजे के बाद शुरू होता है और रात में चंद्रमा देखने के बाद खत्म होता है।
• पति की लंबी उम्र और सौभाग्य के लिए इस दिन भालचंद्र गणेश जी की पूजा की जाती है। करवा चौथ में भी संकष्टी गणेश चतुर्थी की तरह ही दिन भर उपवास कर रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान में ज्यादातर महिलाएं करवा चौथ व्रतोत्सव अपने परिवार में प्रचलित रिवाज के अनुसार मनाती हैं, लेकिन ज्यादातर महिलाएं व्रत रखती हैं और चंद्रोदय का इंतजार करती हैं।
5. करवा चौथ व्रत कब तक रखना चाहिए ?
• यह व्रत हर साल 12 साल या लगातार 16 साल तक किया जाता है। अवधि पूरी होने के बाद इस व्रत का उद्यान (उपसंहार) किया जाता है। जो विवाहित महिलाएं इसे जीवन भर रखना चाहती हैं, वे जीवन भर इस व्रत का पालन कर सकती हैं। इस व्रत के समान दूसरा कोई शुभ व्रत नहीं है। इसलिए विवाहित महिलाओं को अपने सुहाग की रक्षा के लिए यह व्रत लगातार करना चाहिए।
6. करवा चौथ, चौथ माता का मंदिर कहाँ है ?
• वैसे तो चौथ माता जी का मंदिर भारत देश में कई स्थानों पर स्थित है, लेकिन सबसे पुराना और सबसे प्रसिद्ध मंदिर राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा गांव में स्थित है। चौथ माता के नाम पर इस गांव का नाम बड़वारा से बदलकर चौथ का बरवाड़ा कर दिया गया। चौथ माता मंदिर का निर्माण महाराजा भीम सिंह चौहान करवाया था।
7. करवा चौथ व्रत की विधि :-
• कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी अर्थात उस चतुर्थी की रात को जिसमें पूर्ण चंद्रमा दिखाई देने वाला है, उस दिन प्रातः स्नान आदि करके अपने सुहाग (पति) की लंबी आयु, आजीवन आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प मन मे धारण कर दिनभर निर्जल और निराहार रहें।
7.1. करवा चौथ व्रत के लिए चौपाई :-
करक चतुर्थी कार्तिक आई।
करवा चौथ ख्याति घर लाई।।
स्वस्थ समृद्ध रहे सुहाग अपना।
इसी साध में मुझको तपना।।
आयु दीर्घ हो मेरे पति की।
शांति सुखदता जीवन रति की।।
पति ही पत है और आन भी।
मेरे घर का मृदुल मान भी।।
करवा का निर्जल व्रत करती।
भूख - प्यास की चिंता टरती।।
7.2. करवा चौथ पूजन सामग्री :-
1. चंदन, 2. शहद, 3.अगरबत्ती,
4. ताज़ा फूल, 5. कच्चा दूध, 6. शक्कर और बूरा,
7. शुद्ध गाय का घी, 8. ताजा दही,
9. शुद्ध घी में गेंहू के आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर लड्डू नैवेद्य हेतु बनाएँ,
10. गंगाजल, 11. अक्षत (चावल),
12. सिंदूर, 13. मेहंदी, 14. महावर, 15. कंघा,
16. बिंदी, 17. चुनरी, 18. चूड़ी, 19. बिछुआ,
20. काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी के टोंटीदार करवे ढक्कन सहित अथवा तांबे के बने हुए करवे,
21. मिट्टी का दीया, 22. कपास की रुई,
23. कपूर, 24. गेहूं, 25. हल्दी,
26. जल का लोटा, 27. वेदी बनाने के लिए पीली मिट्टी अथवा रेता ,
28. लकड़ी का आसन,
29. चलनी, 30. आठ पूरियों की अठावरी,
31. हलुआ, 32. श्रद्धानुसार दक्षिणा (दान) के लिए पैसे आदि।
7.3. करवा चौथ पूजन विधि :-
• बालू अथवा मिट्टी की वेदी पर भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, भगवान श्री गणेश एवं चंद्रमा जी की मूर्ति स्थापना करें। मूर्ति के अभाव में सुपारी प भावना करके स्थापित करें। उसके पश्चात यथाशक्ति देवों का पूजन करें
7.4. करवा चौथ पूजन हेतु मंत्र
देवी पार्वती पूजन मंत्र: 'ॐ शिवायै नमः'
भगवान शिव का पूजन मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय'
स्वामी कार्तिकेय पूजन मंत्र: 'ॐ षण्मुखाय नमः'
श्री गणेश जी का पूजन मंत्र: 'ॐ गणेशाय नमः'
चंद्रमा देव का पूजन मंत्र: 'ॐ सोमाय नमः'
• करवों में लड्डू का नैवेद्य रखकर नैवेद्य अर्पित करें। एक लोटा, एक वस्त्र व एक विशेष करवा दक्षिणा के रूप में अर्पित कर पूजन समापन करें। करवा चौथ व्रत की कथा ध्यानपूर्वक पढ़ें अथवा सुनें।
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| करवा चौथ में चलनी से चंद्रमा दर्शन करती महिलाएं। |
• सायंकाल चंद्रमा के उदित हो जाने पर चंद्रमा का पूजन कर अर्घ्य प्रदान करें व अपने पति का आशिर्वाद ले इसके पश्चात ब्राह्मण, सुहागिन स्त्रियों व पति के माता-पिता को भोजन कराएँ। भोजन के पश्चात ब्राह्मणों को यथाशक्ति दक्षिणा दें।
• पति की माता (अपनी सासूजी) को उपरोक्त रूप से अर्पित एक लोटा, वस्त्र व विशेष करवा भेंट कर आशीर्वाद लें। यदि वे जीवित न हों तो उनके तुल्य किसी अन्य स्त्री को भेंट कर उनका आशिर्वाद ले । इसके पश्चात स्वयं व परिवार के अन्य सदस्य भोजन करें।
8. प्रथम करवा चौथ व्रत कथा
• एक बार पांडु पुत्र अर्जुन घोर तपस्या करने नीलगिरी नामक पर्वत पर गए। इधर द्रोपदी उनकी चिंता करके बहुत परेशान थीं। काफी समय तक उनकी कोई खबर न मिलने पर उन्होंने कृष्ण भगवान का ध्यान किया और अपनी चिंता व्यक्त की। कृष्ण भगवान ने कहा- बहना, इसी तरह का प्रश्न एक बार माता पार्वती ने शंकरजी से किया था।
तब शंकरजी ने माता पार्वती को करवा चौथ का व्रत बतलाया। इस व्रत को करने से स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षा हर आने वाले संकट से वैसे ही कर सकती हैं जैसे एक ब्राह्मण ने की थी। प्राचीनकाल में एक ब्राह्मण था। उसके चार लड़के एवं एक गुणवती लड़की थी।
• एक बार लड़की मायके में थी, तब करवा चौथ का व्रत पड़ा। उसने व्रत को विधिपूर्वक किया। पूरे दिन निर्जला रही। कुछ खाया-पीया नहीं, पर उसके चारों भाई परेशान थे कि बहन को प्यास लगी होगी, भूख लगी होगी, पर बहन चंद्रोदय के बाद ही जल ग्रहण करेगी।
भाइयों से न रहा गया, उन्होंने शाम होते ही बहन को बनावटी चंद्रोदय दिखा दिया। एक भाई पीपल की पेड़ पर छलनी लेकर चढ़ गया और दीपक जलाकर छलनी से रोशनी उत्पन्न कर दी। तभी दूसरे भाई ने नीचे से बहन को आवाज दी- देखो बहन, चंद्रमा निकल आया है, पूजन कर भोजन ग्रहण करो। बहन ने भोजन ग्रहण किया।
भोजन ग्रहण करते ही उसके पति की मृत्यु हो गई। अब वह दुःखी हो विलाप करने लगी, तभी वहाँ से देवी इंद्राणी निकल रही थीं। उनसे उसका दुःख न देखा गया। ब्राह्मण कन्या ने उनके पैर पकड़ लिए और अपने दुःख का कारण पूछा, तब इंद्राणी ने बताया- आपने बिना चंद्र दर्शन किए करवा चौथ का व्रत तोड़ दिया इसलिए यह कष्ट मिला।
• अब आप वर्ष भर की चौथ का व्रत नियमपूर्वक करना तो तेरा पति जीवित हो जाएगा। उसने इंद्राणी के कहे अनुसार चौथ व्रत किया तो पुनः सौभाग्यवती हो गई। इसलिए प्रत्येक स्त्री को अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत करना चाहिए। अतः भगवान कृष्ण के उपदेश पर द्रोपदी ने यह व्रत किया और अर्जुन सकुशल अपनी तपस्या पूरी कर मनोवांछित फल प्राप्त कर वापस लौट आए। तभी से हिन्दू महिलाएँ अपने अखंड सुहाग के लिए करवा चौथ व्रत करती हैं।
9. द्वितीय करवा चौथ व्रत कथा
• एक समय की बात है कि एक करवा नाम की पतिव्रता नारी अपने पति के साथ नदी के किनारे के गाँव में रहती थी। वह पति की सभी आज्ञाओं का पालन करती और उसका सभी कामों में हाथ बटाती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया। स्नान करते समय वहाँ एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया। वह मनुष्य करवा-करवा कह के अपनी पत्नी को पुकारने लगा।
उसकी आवाज सुनकर उसकी पत्नी करवा भागी चली आई और आकर मगर को कच्चे धागे से बाँध दिया। मगरमच्छ को बाँधकर, जल्द से जल्द करवा यमराज के यहाँ पहुँची और यमराज से विनती कर कहने लगी- हे भगवन! मगरमच्छ ने मेरे पति का पैर पकड़ लिया है। उस मगरमच्छ को पैर पकड़ने के अपराध में आप अपने बल से नरक में ले जाओ।
यमराज बोले- अभी उस दुष्ट मगरमच्छ की धरती पर आयु शेष है, अतः मैं उसे अभी नहीं मार सकता। इस पर करवा बोली अगर आप ऐसा नहीं करोगे तो ,मै एक पतिव्रता नारी हूँ और अपने पतिव्रता धर्म पालन के तप बल से मैं आप को श्राप देकर नष्ट कर दूँगी। सुनकर यमराज डर गए और उस पतिव्रता करवा के साथ आकर मगरमच्छ को यमपुरी भेज दिया और करवा के पति को दीर्घायु दी। हे करवा माता! जैसे तुमने अपने पति की रक्षा की, वैसे सबके पतियों की रक्षा करना।
10. करवा चौथ, 1 नवंबर 2023 के दिन भूल से भी न करे ये काम ?
9.1. सुबह उठते ही आईना न देखे :- आमतौर पर सुबह उठते ही अधिकतर महिलाएं आईना में अपना चेहरा देखती है, लेकिन करवा चौथ के दिन व्रत करने वाली महिलाएं इस दिन सुबह उठते ही आईना देखने की भूल न करे बल्कि सुबह उठते ही अपने दोनों हाथों की हथेलियों को देखते हुए अपने इष्ट देव को याद करके अपने पति की स्वस्थ लंबी उम्र की कामना करते हुए अपने दिन की शुरुआत करें।
9.2. नुकीली और तेजधार वस्तुओं का इस्तेमाल न करे:-
इस दिन सुहागिन महिलाओं को तेजचाक़ू, कैंची आदि का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए, इस दिन करवा चौथ का व्रत करने वाली महिलाओं को सिलाई बुनाई आदि के कामो से भी दूर रहना चाहिए
9.3. सुहाग का सामान न फेकें:- आमतौर पर महिलाएं करवा चौथ के लिए साज सृंगार का नया समान जैसे बिंदी, नेलपॉलिश आदि लेकर आती है और पुराना फ़ेक देती है, लेकिन करवा चौथ के दिन सुहाग की कोई भी चीज न फेकें यह अशुभ माना जाता है।
9.4. इन रंगों को न पहनें:- करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं भूल कर भी काले, नीले और सफेद रंग के कपड़े न पहनें,इस दिन इस रंग के कपड़े पहनना सुहागिन स्त्रियो के लिए अशुभ माना जाता है।
इस दिन लाल, गुलाबी, हरा रंग जैसे चटकीले कपड़े पहनना सुहागिन महिलाओं के प्रतीक है।
9.5. सफेद रंग की चीजों को दान न करे:- करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा की जाती है और सफेद रंग चंद्रमा का प्रतीक होता है, इसलिए इसदिन सुहागिन महिलाएं को सफेद फूल, सफेद नारियल , चावल, दूध, दही और सफेद कपड़े जैसी सफेद चीजो का दान करने से बचना चाहिए।
9.6. पति को नाम से न बुलाए:- अगर आप हमेशा अपने पति को नाम से बुलाती है तो कम से कम इस दिन अपने सुहाग का नाम लेकर न पुकारे ऐसी स्त्री को पतिव्रता होने का पुण्य मिलता है।
11. करवा चौथ के दिन 01 नवंबर 2023 को पुरुष ध्यान में रखे ये बाते :-
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| करवा चौथ पर पत्नी के साथ वक़्त बिताए। |
10.1. पुरुषों को इस दिन मद्यपान से बचना चाहिए और किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थो के सेवन से बचना चाहिए।
10.2. करवा चौथ के दिन पुरुषों को परस्त्रीगमन अथवा परस्त्री को बुरी नज़र से नही देखना चाहिए।
10.3. इस दिन पति को भूल से भी व्रत कर रही अपनी पत्नी को अपशब्द (गाली-गलौज) नही बोलना चाहिए, न ही किसी प्रकार से उसका अपमान करना चाहिए क्योंकि पतिव्रता स्त्री का अपमान करना बहुत बड़ा पाप माना जाता है, और महिला इस दिन अपने पतिव्रता धर्म का पालन कर रही होती है।
10.4. करवा चौथ के दिन पत्नी को खुश रखने की कोशिश करे और उसके साथ समय बिताए, क्योकि करवा चौथ के दिन जिस घर मे व्रत करने वाली महिला खुश नही रहती उस घर मे अलक्ष्मी आकर बैठ जाती है और लक्ष्मी जी रूठ कर चली जाती है।
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